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श्रीगुरुमण्डल स्वरूपिणी, पंचकृत्य-परायणा, “भगवती श्रीललिता महात्रिपुरसुंदरी पराभट्टारिका श्रीमहाचण्डिका महाशक्ति “ की कृपा के फल स्वरूप, वैशाख शुक्ल तृतीया (श्रीअक्षय तृतीया) मंगलवार संवत् २०४५ विक्रमीय दिनांक १९-०४-१९८८ ई. के शुभदिन, “कौलावधूत “ पं. रमादत्त जी शुक्ल “प्रयाग-गौरव “(कुलभूषणानन्द नाथ) के सान्निध्य में “ ‘ कौलिक चक्रवर्त्ती ‘ पं. वेणीमाधव त्रिपाठी ‘ कौलेन्द्र ‘ (पद्मानन्द नाथ)” के करकमलों द्वारा “मुम्बई-शाक्त-सम्मेलन “ की स्थापना की गई थी। इसका रजिस्ट्रेन नम्बर E6578(Thane)- 21-01-2011 है । इस संस्था के संक्षिप्त उद्देश एवं कार्य निम्न प्रकार से हैं ।
1. भारतवर्ष के सनातनी सात्त्विकों एवम् भक्तों को समुचित ‘ धार्मिक आध्यात्मिक ‘ मार्गों पर चलने हेतु प्रेरणा प्रदान करना तथा उन्हें शास्त्र-सम्मत विधियों द्वारा विभिन्न क्रमानुसार देवता-पूजन एवम् उपासना-मार्ग में लगाकर उनके जीवन को सार्थक बनाने हेतु प्रेरित करना ।
2. प्रत्येक सनातन-धर्मी व्यक्ति, परिवार, समाज एवम् सम्पूर्ण राष्ट्र के कल्याणार्थ, वैदिक-आगमिक-पौराणिक छोटे- बड़े यज्ञों का अनुष्ठान करना तथा इन कार्यों में योग्य व्यक्तियों को योग्य बनाना ।
3. प्रत्येक व्यक्ति ( नर-नारी, बाल-बृद्ध ) को विभिन्न आध्यात्मिक-धार्मिक-सामाजिक-आर्थिक गतिविधियों द्वारा समाज-जागरण एवम् राष्ट्र - रक्षा में लगने हेतु प्रेरित करना । इस कार्य में धर्म - जाति - लिंग आदि का कोई भी विरोधाभास नहीं है ।
4. विभिन्न पत्रों - पत्रिकाओं - साहित्यिक - धार्मिक - आध्यात्मिक पुस्तकों एवम् ग्रंथों का प्रकाशन कर उन्हें भारतीय समाज में वितरित करना जिससे लोगों में राष्ट्र एवम् सनातन धर्म के प्रति प्रेम एवम् उत्साह का वर्धन हो सके और राष्ट्र एवम् विश्व का कल्याण हो ।
5. मुम्बई सहित देश के अन्य भागों में भी ‘ शाक्त - सम्मेलनों ‘ का आयोजन कर भारतवर्ष के समस्त शाक्तों - भक्तों सनातनधर्मी जनों को लाकर एक मंच पर स्थापित करना, उनके देश-हित में किए जा रहे कार्यों एवम् अनुभवों को एक दूसरे के समक्ष प्रकट करना । उपरोक्त प्रकार से समाज एवम् सम्पूर्ण देश में एकता एवम् राष्ट्र - सेवा की भावना जागृत करना ।
उपरोक्त प्रकार के समस्त कार्य ‘ मुम्बई-शाक्त-सम्मेलन ‘ द्वारा ई. सन् 1988 से ही किए जा रहे हैं । “ महाशक्ति “ से अन्तर्मन से प्रार्थना है कि हे माँ ! उपरोक्त समस्त धार्मिक - आध्यात्मिक - सामाजिक कार्य “ मुम्बई - शाक्त - सम्मेलन “ द्वारा निर्वाध रूप से कराती रहो और भारतवर्ष का सर्वविधि ‘ चतुर्दिक विकास एवम् कल्याण ‘ सतत् करती रहो ।
।। भारतमाता की जय ।। वन्दे भारत मातरम् ।। भारतमाता की जय ।।
मुम्बई - शाक्त - सम्मेलन के कल्याणत्रयी कार्य
1. ‘ राष्ट्र - रक्षा ‘ हेतु ‘ राष्ट्र - रक्षा - अनुष्ठान ‘ का प्रयोग
2. राष्ट्र - समाज के कल्याण हेतु विभिन्न अनुष्ठानों एवम् यज्ञों का आयोजन
3. सनातनधर्मी जनों के हितार्थ एवम् राष्ट्र- रक्षा, राष्ट्र- जागरण के लिए धार्मिक - आध्यात्मिक पुस्तकों - ग्रंथों का प्रकाशन
6. हमारे राष्ट्र ‘ भारतवर्ष ‘ की रक्षा एवम् चहूँ दिशि उत्थान हेतु “ राष्ट्र - रक्षा - अनुष्ठान “ का आयोजन नित्य प्रति भक्तों द्वारा किया जा रहा है । प्रत्येक भक्त प्रतिदिन 3 बार “ सप्तश्लोकी दुर्गा “ का पारायण स्वतः अपने - अपने घरों में कर रहे हैं तथा “ श्री श्रीदुर्गामहाशक्ति- पीठ “ में भी सामूहिक रूप से उक्त अनुष्ठान का आयोजन हो रहा है ।
7. राष्ट्र एवम् समाज के कल्याण हेतु विभिन्न यज्ञों एवम् अनुष्ठानों का आयोजन ‘ सम्मेलन ‘ द्वारा सतत् किया जा रहा है जिसमें मुख्यतः निम्नलिखित प्रयोग होते रहते हैं यथा-
श्री सद्गुरु महायाग, श्री गणेश महायाग, श्री साम्ब- सदाशिव महायाग, श्री हनुमान महायाग, श्री वटुक भैरव महायाग, श्री शतचंडी महायाग, श्री ललिता महायाग, श्री महारुद्र महायाग, श्री मातंगी महायाग, श्री वाराही महायाग, श्री दुर्गासप्तशती पारायण, श्री नवचण्डी महायाग, श्री सार्द्ध नवचण्डी महायाग, हवनात्मक चण्डी पारायण, श्री खड्गमाला पारायण, कुलमार्गीय सप्तशती पारायण, श्री दुर्गासप्तशती के शताधिक मंत्र प्रयोग, श्री सूक्त प्रयोग, भगवान् श्रीवटुकभैरव अनुष्ठान प्रयोग, कई प्रकार दीपार्चन प्रयोग, महाव्याधि प्रशमनी देवता प्रयोग, निशार्चन, रात्रि जागरण एवम् अखण्ड कीर्तन आदि ।
8. देश एवम् समाज के जागरण एवम् कल्याण हेतु बहुत से साहित्यिक एवम् आध्यात्मिक - धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन एवम् “ श्री भव- चक्र- प्रवर्त्तिनी “ पत्रिका का षड्मासिक प्रकाशन भी “ मुम्बई - शाक्त - सम्मेलन “ द्वारा किया जा रहा है जिसमें मुख्यतः कुछ निम्नलिखित प्रकार से हैं यथा-
1. श्री महागणपति नित्यार्चन
2. श्री चण्डी ( दुर्गा ) नित्यार्चन
3. श्री ललिता नित्यार्चन
4. श्री बालाम्बिका नित्यार्चन
5. श्री मातंगी नित्यार्चन
6. श्री वाराही नित्यार्चन
7. श्री महालक्ष्मी नित्यार्चन
8. श्री महासरस्वती नित्यार्चन
9. श्री साम्ब सदाशिव नित्यार्चन
10. श्री आंजनेय हनुमान नित्यार्चन
11. श्री श्रीविद्या खड्गमाला
12. श्री जगदम्बा संगीतार्चन
13. अपदुद्धारक श्रीवटुकभैरव स्तोत्र
14. पंच तांत्रिक प्रयोग
15. कौलारार्तिक मंजरी
16. राष्ट्र-रक्षा-अनुष्ठान प्रयोग
17. श्री जगदम्बा भजनमाला ( भाग 1 से भाग 6 तक )
18. श्री जगदम्बा भजनमाला भाग- 7 ( यंत्रस्थ ) आदि ।